नई दिल्ली | वर्ल्ड न्यूज़
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव के बीच रूस ने भारत को कच्चे तेल पर भारी छूट देकर बड़ा तोहफ़ा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाते हुए रूस से नज़दीकी का हवाला दिया था। लेकिन अब रूस के इस फैसले से ट्रंप का गुस्सा और बढ़ना तय है।

भारत को रूसी तेल पर कितनी छूट?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस ने भारत को दी जाने वाली तेल की छूट बढ़ाकर 3-4 डॉलर प्रति बैरल कर दी है।

  • जुलाई में यह छूट सिर्फ 1 डॉलर प्रति बैरल थी।
  • अगस्त के अंत तक यह 2.50 डॉलर प्रति बैरल हुई।
  • सितंबर-अक्टूबर में नई दरों पर और सस्ता तेल भारत को मिलेगा।

इस कदम से भारतीय रिफाइनरियों को सीधा फायदा होगा और रूस-भारत की ऊर्जा साझेदारी और मजबूत होगी।

ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी

पिछले हफ्ते ट्रंप प्रशासन ने भारत पर लगने वाले टैरिफ को दोगुना कर 50% कर दिया। अमेरिका का आरोप है कि भारत, रूस से कच्चा तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद कर रहा है।

व्हाइट हाउस के सलाहकार पीटर नवारो ने यहां तक कहा कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर उसे रिफाइन करता है और फिर यूरोप, अफ्रीका और एशिया को प्रीमियम पर बेचता है। इससे “रूसी युद्ध मशीन” को मदद मिलती है।

शंघाई शिखर सम्मेलन से बड़ा संदेश

हाल ही में चीन में हुए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस और भारत के बीच संबंधों को “विशेष” बताया। इस दौरान मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात ने भी वैश्विक संदेश दिया कि भारत एशियाई देशों के साथ अपने रिश्तों को मज़बूत कर रहा है।

अमेरिका-भारत रिश्तों में खटास

अमेरिकी दबाव और टैरिफ के बावजूद भारत ने रूस से तेल आयात जारी रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न सिर्फ़ आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भू-राजनीतिक स्तर पर भी भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को दर्शाता है।

By Anshum Raj

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